यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निर्घषणच्छेदन तापताडनैः।

तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा।।

 

भावार्थ :

घिसने, काटने, तापने और पीटने, इन चार प्रकारों से जैसे सोने का परीक्षण होता है, इसी प्रकार त्याग, शील, गुण, एवं कर्मों से पुरुष की परीक्षा होती है ।

सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियं।

प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः॥

 

भावार्थ :

सत्य बोलें, प्रिय बोलें पर अप्रिय सत्य न बोलें और प्रिय असत्य न बोलें, ऐसी सनातन रीति है ॥

Free Deliver

In convallis nulla et magna congue

Export Support

In convallis nulla et magna congue

10% Discount

In convallis nulla et magna congue

OUR BLOG

Ut nec semper ligula nulla lacus nisl

Start typing and press Enter to search

Shopping Cart

No products in the cart.